डिजिटल पेमेंट बढ़ाने की कसरत और इसके पीछे का गुणा-भाग

मैं पिछले कुछ समय से प्रचलित-मुद्रा में वृद्धि और भारतीयों द्वारा डिजिटल पेमेंट यानी भुगतान के परिमाण पर करीबी नजर रखे हुए हूँ। दरअसल मैं जानने की कोशिश कर रहा हूँ कि नवंबर 2016 में नोटबंदी लागू होने के बाद लोग ‘अधिकाधिक’ डिजिटल पेमेंट की ओर बढ़ रहे हैं कि नहीं। नोटबंदी के पीछे एक मंशा अधिक-से-अधिक लोगों को डिजिटल की तरफ ले जाने की भी थी। मैं शब्द ‘अधिकाधिक’ का प्रयोग कर रहा हूँ। क्योंकि नोटबंदी के बावजूद वर्षों से लोग पेमेंट के डिजिटल मोड की ओर बढ़ते ही रहे हैं, इसकी रफ्तार भी खासी अच्छी रही है। तालिका-1 पर नजर डालें। इसमें पिछले कुछ महीनों से भारत में डिजिटल ट्रॉन्जैक्शन के परिमाण को दर्शाया गया है। यह तालिका 10 मार्च 2017 में प्रकाशित भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट *Macroeconomic Impact of Demonetisation: A Preliminary Assessment * से ली गयी है। तालिका में फरवरी 2017 तक आँकड़े थे। इसमें मैंने मार्च 2017 के आँकड़ों को भी शामिल कर लिया है।

तालिका-1 : डिजिटल ट्रॉन्जैक्शन की संख्या
Volume (in Crore) Nov-16 Dec-16 Jan-17 Feb-17 Mar-17
National Electronic Funds Transfer 12.3 16.6 16.4 14.8 18.7
Cheque Truncation System 8.7 13 11.8 10 11.9
Immediate Payment Service 3.6 5.3 6.2 6 6.7
Unified Payment Interface 0.03 0.2 0.42 0.42 0.62
Unstructured Supplementary Service Data 0 0.01 0.03 0.02 0.02
Debit and Credit Card Usage at Point of Sales 20.6 31.1 26.6 21.2 23
Prepaid Payment Instrument 5.9 8.8 8.7 7.8 9
Total 51.1 75.0 70.2 60.2 69.9

*Source: Reserve Bank of India

फरवरी 2017 और मार्च 2017 के बीच डिजिटल ट्रॉन्जैक्शन का कुल आँकड़ा लगभग 16 प्रतिशत के उछाल के साथ 69.9 करोड़ पर पहुँच गया। इसके दो कारण हैः एक, मार्च 2017 में प्रचलित-मुद्रा की वृद्धि दर में नाटकीय रूप से कमी आ गयी। मैंने पिछले सप्ताह ही इसके बारे में चर्चा की थी। आँकड़ा-1 पर नजर डालें। इसमें 6 जनवरी 2017 से सप्ताह-दर-सप्ताह प्रचलित-मुद्रा में वृद्धि की दर दी गयी है।

आँकड़ा-1 :

मार्च में प्रचलित-मुद्रा की वृद्धि दर में मंदी आने की वजह तो सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक ही बता सकते हैं। मंदी का मतलब ? 3 मार्च 2017 को 11 लाख 98 हजार 412 करोड़ रुपये की प्रचलित-मुद्रा में थी। यह 10 मार्च 2017 को बढ़ कर 12 लाख 45 हजार 819 करोड़ रुपये हो गयी। इसका मतलब कि 47 हजार 407 करोड़ रुपये यानी लगभग 4 प्रतिशत का उछाल (47,407 रुपये विभाजित 11,98,412)। 4 प्रतिशत का उछाल प्रचलित-मुद्रा में वृद्धि की दर कही जाती है। 30 मार्च 2017 को समाप्त सप्ताह के दौरान प्रचलित-मुद्रा में 1.7 % की वृद्धि दर्ज हुई। इस प्रकार देखते हैं कि हालाँकि प्रचलित-मुद्रा में बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन इस बढ़ोतरी की दर में नाटकीय दर से गिरावट आयी है। 13 जनवरी को समाप्त सप्ताह में इसमें 5.9 % का इजाफा रिकार्ड किया गया था।
प्रचलित-मुद्रा में धीमी वृद्धि से आम आदमी की जरूरत पूरी नहीं हो रही थी। काफी हद तक यह बयान कर देता है कि औमतौर पर एटीएम में पैसे क्यों नजर नहीं आ रहे हैं। एक सीमा तक यह भी डिजिटल ट्रॉन्जैक्शन को बढ़ाने में मददगार साबित हुआ है। तालिका-1 में बिक्री के टर्मिनलों पर डेबिट और क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल पर एक नज़र डालें। जनवरी से फरवरी 2017 के बीच उनके इस्तेमाल में नाटकीय रूप से गिरने के बाद, मार्च में एक बार फिर इनके इस्तेमाल में 8.5 प्रतिशत का उछाल आया। यह इस तथ्य का एक अच्छा संकेत है कि मुद्रा की कमी ने लोगों को डिजिटल धन का उपयोग करने के लिए मजबूर किया है। इन सबसे एकदम अलग, एक मौसमी कारक भी हैः मार्च वित्तीय वर्ष का आखिरी महीना है और महीने के दौरान डिजिटल भुगतान बढ़ने लगते हैं, क्योंकि लोग करों का भुगतान करते हैं (आयकर और सेवा कर अग्रिम करते हैं) और उनके बीच व्यापारिक भुगतानों को व्यवस्थित करते हैं। तालिका-2 पर एक नज़र डालें। यह नवंबर 2015 और अप्रैल 2016 के बीच किए गए डिजिटल भुगतानों को दर्शाता है। इसमें पता चला है कि डिजिटल भुगतानों ने फरवरी 2016 और मार्च 2016 के बीच छलांग लगायी है।

तालिका-2 :
Volume (in Crore) Nov-15 Dec-15 Jan-16 Feb-16 Mar-16 Apr-16
National Electronic Funds Transfer 10 12 11.9 11 12.9 11.2
Cheque Truncation System 7.1 8.2 7.8 8.4 8.8 7.9
Immediate Payment Service 1.9 2.1 2.3 2.4 2.6 2.7
Debit and Credit Card Usage at Point of Sales 16.6 17.8 18 17.2 18.5 19.1
Prepaid Payment Instrument 6.3 6.9 6.5 6.5 7.2 6.9
Total 41.9 47 46.5 45.5 50 47.8

*Source: Reserve Bank of India

तालिका-2 में, मैंने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआइ) के साथ-साथ अनस्ट्र्क्चर्ड सप्लीमेंटरी सर्विस डाटा को नजरअंदाज किया है, यह देखते हुए कि संख्या बहुत छोटी है और इसका कोई समग्र प्रभाव नहीं है। जैसा कि तालिका-2 से देखा जा सकता है, मार्च 2016 में डिजिटल लेन-देन की कुल संख्या फरवरी 2016 की तुलना में। 9.9% से बढ़कर 50 करोड़ हो गई। फरवरी 2017 और मार्च 2017 के बीच, 15 प्रतिशत का उछाल ( यूपीआइ के साथ- अनस्ट्र्क्चर्ड सप्लीमेंटरी सर्विस डाटा को छोड़कर ) था। जैसा कि पहले बताया गया है, इस छलांग का एक अंश नकदी की कमी के कारण है, जिसे सरकार चाहती है और इस छलांग का एक अंश मात्र मौसमी प्रभाव है; क्योंकि लोग अपना कर भुगतान करते हैं और अपने साल के अंत में व्यापार भुगतानों को व्यवस्थित करते हैं।

जैसा कि तालिका-2 से पता चलता है, अप्रैल 2016 में, डिजिटल लेनदेन की कुल संख्या में लगभग 4.4 प्रतिशत की कमी आयी। यह देखते हुए, एक बार अप्रैल 2017 का डाटा आ जाता है, हम डिजिटल भुगतान पर नकदी की कमी और कमी के प्रभाव पर एक बहुत स्पष्ट प्रवृत्ति की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

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यह आलेख मूल रूप से यहाँ पर (अंग्रेजी में ) प्रकाशित हुआ है।

विवेक कौल , ‘द विवेक कौल् ’स डायरी’ और ‘द विवेक कौल लेटर’ के संपादक हैं। विवेक मार्च 2015 में प्रकाशित Easy Money: The Greatest Ponzi Scheme Ever and How It Is Set to Destroy the Global Financial System नामक पुस्तक-त्रयी (ट्रिलॉजी) के लेखक हैं। उनकी ये पुस्तकें ई-कॉमर्स वेबसाइट ऐमज़ान पर बेस्टसेलर रह चुकी हैं। विवेक की नवीनतम किताब India’s Big Government - The Intrusive State and How It is Hurting Us है।

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